अमेरिका में कोरोना संकट : एच -1 बी वीजा होल्डर भारतीय महिलाओं की नौकरी खतरे में

भारतीय महिलाओं की नौकरी खतरे में : संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीयों को बड़ी नौकरी के नुकसान की आशंका है और कोरोनोवायरस संकट के मद्देनजर बड़े पैमाने पर छंटनी की उम्मीद है। महामारी दुनिया भर के व्यवसायों को बंद कर रही है और कई कार्यालयों को बंद कर दिया गया है और बिज़नेस कम्पनीज अस्थायी कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रही है या बैक-ऑफ़िस स्टाफ को हटा रही है।

पीटीआई की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि एच -1 बी वीजा पर विदेशी प्रौद्योगिकी पेशेवरों ने ट्रम्प प्रशासन से अमेरिका में रहने के लिए अपनी अनुमति के बाद नौकरी की हानि सीमा को मौजूदा 60 से 180 दिनों तक बढ़ाने के लिए कहा है। 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में एच -1 बी वीजा धारकों में से तीन चौथाई भारतीय हैं। अगर छटनी बड़े पैमाने पर हुई तो बड़ी संख्या में अमेरिका में काम करने एच-1 बी वीजा होल्डर भारतीय महिलाओं की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।

जबकि अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हज़ारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए एच-1 बी वीजा पर निर्भर करती हैं, लेकिन हमारे देश यह भी जानते हैं कि इस आउटसोर्सिंग व्यवसाय से भारत को बहुत अधिक धनराशि मिलती है। यह कार्यस्थल पर एक उम्दा व्यावसायिक मॉडल रहा है।

वैसे भी संयुक्त राष्ट्र और इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड यानी आईएमएफ ने भी वैश्विक मंदी के आसार दिए है तो ऐसे में कामकाजी महिलाओं खासकर सर्विस सेक्टर में काम करने वाली भारतीय महिलाओं के लिए यूएस में काम करना तो मुश्किल होगा ही साथ ही उन्हें अन्य देशों में भी जॉब जाने के खतरे का सामना कर पड़ सकता है जिसका सीधा कारण है कोरोना का खतरा जो पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिए हुए है।

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भारतीय महिलाओं की नौकरी खतरे में : अमेरिका में मौजूदा नियमों के तहत नौकरी छोड़ने के 60 दिनों के भीतर अपने परिवार के सदस्यों के साथ अमेरिका छोड़ने के लिए एच -1 बी वीजा धारक की आवश्यकता होती है। H-1B वीजा पर वे बेरोजगारी लाभ के पात्र नहीं हैं। वे सामाजिक सुरक्षा लाभों के भी हकदार नहीं हैं, भले ही इस उद्देश्य के लिए उनके वेतन से कटौती हो।

आर्थिक विशेषज्ञों को मौजूदा आर्थिक संकट के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छंटनी का डर है। आने वाले हफ्तों और महीनों में हालात और बिगड़ने वाले है।

प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि काफी संख्या में एच -1 बी कर्मचारियों की छटनी की जा रहा है। कुछ मामलों में, कंपनियों ने अपने एच -1 बी कर्मचारियों को पहले ही सूचित कर दिया है कि वे निकाल दिए जाने की सूची में शीर्ष पर हैं।

ऐसे में भारतीय महिलाओं का क्या? कोरोनावायरस ब्रेकडाउन के उपरान्त उनके रोज़गार की जिम्मेदारी भारत सरकार को पूरी संवेदनशीलता से निभानी होगी ताकि उनके साथ उनके परिवार की भी अर्थक एवं सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

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