10 में से 9 लोग औरतों के प्रति पक्षपाती है ……. पर क्यों ?

क्या है लोगों का महिलाओं के प्रति पक्ष ? घोर पक्षपाती ! जी हाँ एक ताज़ा सर्वे से इस बात अनोखी बात खुलासा हुआ है कि 10 में 9 लोग औरतों के प्रति पक्षपाती रवैया एवं पक्ष रखते है। जी हाँ ! सिर्फ मर्द जात ही नहीं बल्कि औरतों का भी अपनी ही लिंग के प्रति पक्षपाती रवैया है। अब इस बात की सत्यता दिखने के लिए पूरी बात को जड़ तक जानना बेहद ज़रूरी है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा गुरुवार को प्रकाशित नए निष्कर्षों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत लोग महिलाओं के खिलाफ पक्षपाती हैं। समानता के अंतर को बंद करने की दिशा में कदम उठाने के बावजूद, 91 प्रतिशत पुरुषों और 86 प्रतिशत महिलाओं ने राजनीति, अर्थशास्त्र, शिक्षा, हिंसा या प्रजनन अधिकारों के बारे में महिलाओं के खिलाफ कम से कम एक पूर्वाग्रह रखा है।

यूएनडीपी द्वारा संचालित यह पहला सामाजिक लिंग ‘सामाजिक आइडियल सूचकांक’ है, जिसमें 75 देशों के डेटा का विश्लेषण किया गया है, जो दुनिया के 80 प्रतिशत से अधिक पापुलेशन को रिप्रेजेंट करते हैं।

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इस रिसर्च स्टडी में यह पाया गया कि लगभग 50 प्रतिशत लोगों को लगता है कि पुरुष बेहतर राजनेता हैं और 40 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं कि पुरुष बेहतर कारोबारी नेता बनाते हैं।

एक तिहाई पुरुष और महिलाएं सोचते हैं कि एक आदमी के लिए अपनी वाइफ को पीटना स्वीकार्य है।डेटा को 2005-09 और 2010-2014 से एकत्र किया गया था, जिसके लिए यह लेटेस्ट डेटा ईयर है।

रिसर्च किए गए 75 देशों में से केवल छह ऐसे थे जिनमें अधिकांश लोगों के पास महिलाओं के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं था। इन देशो में प्रमुख तौर पर एंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शामिल है भी जहाँ कुछ सबसे प्रगतिशील समाज पाए गए और यहाँ केवल आधी आबादी लिंग पूर्वाग्रह से पूरी तरह मुक्त थी।

कुछ जगहों पर समस्या बदतर हो रही है। यदि आप इस रिसर्च स्टडी पास मौजूद जानकारी का समग्र औसत लेते हैं, तो हम दिखाते हैं कि औसतन हम वापस पक्षपाती स्केल पर खिसक रहे हैं – जो कि पक्षपात के टोन के सिकुड़ने के बजाय वापस बढ़ रहे हैं।

उदाहरण के लिए, स्वीडन कई देशों में से एक था – जिसमें दक्षिण अफ्रीका, भारत, रवांडा और ब्राजील शामिल थे, जिसमें नौ वर्षों में कम से कम एक बार पूर्वाग्रह रखने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई।

ब्रिटेन और अमेरिका में आधे से अधिक लोग कम से कम एक पूर्वाग्रह रखते थे। ‘सामाजिक आइडियल सूचकांक सर्वे के परिणामस्वरूप, यूएनडीपी सरकारों से उन कानूनों और नीतियों को शुरू करने के लिए कह रहा है जो निष्कर्षों में स्पष्ट लिंग पूर्वाग्रह को स्पष्ट करते हैं।

तो हम निश्चित तौर पर कह सकते है कि अभी अधिकतर लोग पक्षपाती हो चलें है लेकिन वास्तव में इस सूरत-ए-हाल को बदलने की कवायद शुरू करने लाज़मी हो चला है जिसके तहत लोग बिना किसी लिंग के आधार के भेदभाव का समझ इस धरती पर स्थापित कर सकें।

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